गणेश चतुर्थी हिन्दुओं का बहुत ही पावन त्यौहार है। इसे पूरे भारत देश में बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है।
इस त्यौहार में गणपति बप्पा की पवित्र मूर्ती को बड़ी धूम-धाम से अपने घर लाया जाता है और स्थापित किया जाता है।
विघ्नहर्ता गणपति की हर घर में 10 दिनों तक पूजा की जाती है। वो हमारे सारे विघ्नों को हर लेते है।
उसके बाद यथा विधि उस मूर्ती को 'अनंत चतुर्दशी' के दिन, नदी, तालाब या समुद्र में विसर्जित कर दिया जाता है।
गणेश जी की पूजा करने से घर में सुख शांति बनी रहती है।
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| गणपति बप्पा |
कहानी गणेश चतुर्थी की !!
कहानी गणेश चतुर्थी की !!
कहानी गणेश चतुर्थी की !!
गणेश जी और दोनों माताओं ने उनको अच्छी तरह से परास्त किया।
वे तुरंत कैलाश लौटे और उन्होंने शिव जी को इस बात से अवगत कराया। शिव जी ने कहा कि " मैं खुद अब इस खतरे को समाप्त कर दूंगा "।
शिव जी और सब महारथी फिर गए युद्ध करने। लड़के ने फिर से हमला करना शुरू कर दिया,
शिव जी उस लड़के के पराक्रम और शक्ति पर चकित हो गए।
उन्होंने सोचा "यह लड़का सर्वश्रेष्ठ योद्धाओं से भी श्रेष्ठ है।"
शिव जी ने अपने त्रिशूल से लड़के का सिर काट दिया।
शिव जी ने कहा "मैंने क्या कर दिया ये ? अब मैं पार्वती का सामना कैसे कर सकता हूं ?
उसका बेटा भी मेरा था और मैंने ही उसे मार डाला "।
जल्द ही पार्वती जी ने खबर सुनी और उनके दुख की कोई सीमा नहीं थी।
क्रोध से पार्वती ने काली और दुर्गा को बुलाया और उन्हें सभी को नष्ट करने का आदेश दिया।
काली और दुर्गा ने सभी को मारने लगी। सभी देवता कांप उठे।
अंत में ब्रह्मा जी और विष्णु जी दौड़कर मां पार्वती के पास पहुंचे और
कहा कि "कृप्या हमें माफ कर दो और अपनी देवीयों को बुलाओ, आप जो भी कहेंगी हम करेंगे।
कृपया हम पर दया करें। माँ पार्वती ने कहा, "मैंने अपने बेटे को खोया है।यदि आप उसे जीवित करते हैं और उसे देवताओं के बीच सम्मानजनक दर्जा देते हैं।
तो मैं अपनी शक्तियों को वापस बुला लुंगी अन्यथा नहीं! " देवता शिव जी के पास लौट आए।
उन्होंने कहा, "हे प्रभु!! कृपया लड़के को पुनर्जीवित करें और हमें बचाएं। " शिव जी ने उस लड़के को पुनर्जीवित करने की बात स्वीकार कर ली।
कहानी गणेश चतुर्थी की !!
उन्होंने कहा, "गणों! जाओ और किसी भी सोते हुए प्राणी का सिर ले आओ, जो उत्तर दिशा की तरफ मुँह करके सो रहा हो "।
जल्द ही उन्होने उत्तर की ओर मुँह कर के सोये हुए एक हाथी को देखा।
उसका सिर काटकर शिव जी के पास ले आए। शिव जी ने हाथी का सिर बालक के शरीर पर रखा और एक मंत्र का पाठ किया।
अगले ही पल लड़का उठ गया जैसे नींद से उठ रहा हो। देवता उसे पार्वती के पास ले गए।
उन्होंने कहा, " पुत्र !! मैं तुम्हें जिंदा देख कर खुश हूँ।"
शिव जी ने कहा, " यह बहादुर लड़का तुमने बनाया है, यह मेरा भी बेटा होगा और मैं इसे अपने सभी गणों का स्वामी बनाता हूँ
और इसको 'गणेश' के रूप में संबोधित किया जाएगा। अब से गणेश की सबसे पहले पूजा की जाएगी"।
तब पार्वती जी ने कहा कि "मेरे पुत्र को आशीर्वाद दें। भगवान आपका धन्यवाद"। गणपति बप्पा मोरिया !!!


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