Hindi Kahani - नए घर में हंगामा !!
हमने दक्षिण दिल्ली में एक अच्छा सा फ्लैट खरीदा था। आज उसका गृह-प्रवेश का दिन था।
पंडित जी ने बहुत सारे गृह-नक्षत्र देख कर आज का दिन चुना था।
ये एक बेहद सुहाना फरवरी महीने के रविवार का दिन था।
सुबह से ही मेहमानों ने आना शुरू कर दिया था। हम सब घर सजाने में लगे हुए थे।
पुरा दरवाज़ा मैंने फूलों से ढक दिया गया था। घर के अंदर पंखों पर चमकदार झालर लगाई हुई थी।
पूरे घर में बच्चों ने हल्ला मचा रखा था। सब यहाँ से वहां भाग-दौड़ कर रहे थे।
बुआ जी हवन सामग्री को एकत्र करने में व्यस्त थी।
दीदी घर में सब खाने की व्यावस्था करने में व्यस्त थी।
भाभी सब आने वाले मेहमानों के बैठने की व्यावस्था करने में व्यस्त नज़र आ रही थी।
बहुत हलचल मची हुई थी। अब पंडित जी के भी आने का समय हो चला था।
Hindi Kahani - नए घर में हंगामा !!
पंडित जी लगभग हांफते हुए दरवाज़े पर पहुंचे और कहा, "अरे भाई दूसरी मंजिल तक अब चढ़ा नहीं जाता।
मैंने पंडित जी की पैर छुए और अंदर आने को कहा।
पंडित जी ने आशीर्वाद देते हुए कहा, "सब तैयारी पूरी हो गई हैना मनु जी ?"
मैंने कहा, "जी बिलकुल पंडित जी, बस 5 प्रकार के फल और 5 प्रकार की मिठाई लानी रह गयी है,
वो भी बस आती होगी "। इतने में मेरे चाचाजी के लड़के ने चिल्लाते हुए कहा, " ये भी आ गया मनु भैया।
वो मिठाई और फल दिखाते हुए बोला। पंडित जी ने अब अपना आसन ग्रहण किया
और अपनी तैयारी में लग गये। हम सब पंडित जी के आस पास बैठ गए।
पंडित जी ने सभी लोगों को हाथ में चम्मच देते हुए कहा,
"जब भी हम 'स्वाहा' बोलें तो सब घी को चम्मच से हवन कुंड में अर्पण कर दें"।
घी गरम था और पिघला हुआ था ताकि वो आराम से हवन में डाला जा सके।
सबने हां कहा और मंत्रोचारण शुरू हो गया। पंडित जी स्वाहा बोलते
और हम सब गरम घी हवन में डालते जाते।
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सब एक साथ ऐसा कर रहे थे तो कई बार हमारे चमच्च आपस में ही टकरा जाते थे।
उधर बच्चों ने हल्ला मचा रखा था । बीच-बीच में पंडित जी बच्चों को डांट भी लगा रहे थे
और कह रहे थे, "अरे शैतानों, शांत रहो, नही तो हम अपने मंत्र ही भुल जायेंगे। "
इसी अफरा-तफ़री में, बुआ जी ने, पंडित जी के स्वाहा बोलते ही, गरम घी हवन
कुंड में डालने के बजाये पंडित जी के हाथ पर डाल दिया,
और पंडित जी चिल्ला पड़े, " स्वाहााााा..!!!! अरे ध्यान से कीजिये जजमान, क्या कर रहे हैं " बुआ जी ने क्षमा मांगी और फिर से हवन शुरू हुआ।
पंडित जी जैसे ही आगे बढे, एक मोटा सा गेंदे का फूल उनके मुँह से टकराया।
वो चिल्ला उठे, "अरे शैतानों ये किसने मारा ?"
बच्चे डर के मारे वहां से भाग गए। पंडित जी बोले, "हे !! राम ये क्या हो रहा है।"
अब भैया ने क्षमा मांगी और हवन आगे बढ़ाने को कहा। चलो, फिर से मंत्रोचारण शूरू हुआ।
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अब की बार जैसे ही पंडित जी ने हवन में डालने के लिये घी की तरफ हाथ बढ़ाया,
तो पाया की वो वहां है ही नही।
मेरी भांजी वो डब्बा लेकर भाग गई थी। पंडित जी आंखें बड़ी करते हुए बोले, "हे !! राम ये क्या हो रहा है। "
अब हम घी का डब्बा ढूँढ कर वापस लाये। हवन फिर से शुरू हुआ। जैसे तैसे हवन पुरा हुआ।
अब पंडित जी ने भोग लगाने के लिये मिठाई का डब्बा खोला तो
पाया की वो पहले ही आधा हो चुका है।
वो लगभग रोते हुए बोले, "अरे अब ये मिठाई कहां गई भाई।" बच्चे वो मिठाई पहले ही खा चुके थे।
आवाज़ लगाकर सबको बुलाया गया,तो पाया, सबके मुंह पर मिठाई लगी हुई थी।
मेरी बहन और बुआ जी ने बच्चों को डांटा।
इतने में पंडित जी बोल पड़े, "अरे कोई बात नहीं बेटा, ये बच्चे भी तो भगवान का ही रूप होते हैं।
समझो लग गया भगवान जी को भोग।"
लेकिन फिर मैं जल्दी से जाकर और मिठाई ले आया। और फिर पूजा संपन्न हुई।
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पंडित जी को खाना खिलाया और दक्षिणा देकर विदा किया गया।
हम सब घरवालों ने बाद में खाना खाया और सब ने पूरा दिन खूब आनंद किया ।


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