एक पुराने समय की बात है, एक बहुत गरीब किसान था।
वह अपने काम के प्रति काफी समर्पित था और उसकी कमाई उसकी सभी जरूरतों को पूरा कर लेती थी।
एक शाम, अपने काम से लौटने के बाद, उसे बहुत भूख लगी थी।
उसने सोचा "मैं आज रात क्या पकाऊ ?" उसी समय उसने अपनी झोपड़ी के बाहर एक मुर्गी कुड़कुड़ाते हुए सुना।
उसने उसको ही खाने का सोचा। थोड़ी कोशिश करने के बाद किसान ने मुर्गी पकड़ ही ली।
जैसे ही वह मुर्गी को मारने वाला था, मुर्गी बोली " किसान, कृपया मुझे मत मारो। मैं आपकी मदद करूंगी। "
किसान सोचा, " एक मुर्गी!! कैसे बात कर सकती है?" और कहा " ठीक है मैं तुम्हें नहीं मारूंगा। लेकिन, तुम मेरी मदद कैसे करोगी ?"
मुर्गी ने कहा "अगर आप मुझे छोड़ दो, तो मैं आपको रोज़ एक सोने का अंडा दूंगी "।
किसान ने कहा, "क्या? एक सोने का अंडा? वह भी हर दिन?" फिर किसान ने मुर्गी को छोड़ दिया।
अगली सुबह जैसे ही किसान उठा। वह मुर्गी के पास गया देखने कि मुर्गी ने कोई सोने का अंडा रखा है या नहीं।

उसने पाया की उधर सोने का अंडा है और बोला, "वाह ! यह तो सच में एक सोने का एक अंडा है।"
वह खुशी-खुशी सोने का अंडा लेकर शहर उसे बेचने चला गया। शहर में सब सोने का अंडा देखकर हैरान हुए।
किसान ने सोने का अंडा अच्छी कीमत पर बेचा।
अगले दिन, जब वह उठा, वह सीधे बाहर देखने के लिए चला गया कि क्या वहां एक और सोने का अंडा है।
वहां एक और सोने का अंडा था। उस दिन के बाद मुर्गी ने उसे हर रोज सोने का अंडा दिया।
जैसे-जैसे किसान सोने के अंडों की वजह से अमीर होता गया, वह लालची भी होता गया।
फिर उसने सोचा "मैं मुर्गी को मार देता हूं और जो अंदर सोने की खान है वो मुझे मिल जाएगी।
इस तरह मेरे पास एक बार में उसका सारा खजाना होगा। "
इसिलिए किसान ने उसे काटकर खोलने का फैसला किया और उसने देखा तो उसे मुर्गी के अंदर कुछ नहीं मिला।
इस तरह न तो उसे मुर्गी मिली और न ही सोने के खजाने वाली अपार संपत्ति मिली जिसके लालच में उसने मुर्गी को मारा।
वह अपने नुकसान के लिए एक बहुत रोया और पछताया।
सही में दोस्तों, लालच बहुत बुरी बला है !!!!

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