15 अगस्त,1947 हमारे देश के लिये एक बहुत ही महत्वपूर्ण दिन है।
इस दिन हमने अंग्रेजी शासन (यूनाइटेड किंगडम) से लगभग 200 सालों बाद आज़ादी ली थी।
'स्वंत्रता दिवस' पूरे देश में मनाया जाता है, इस दिन तिरंगा फहराया जाता है,
परेड निकाली जाती है और तरह-तरह के सांस्कृतिक कार्यक्रम होते हैं।
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| तिरंगा |
Hindi Kahani - 15 अगस्त और मेरी तैयारी !!
'15 अगस्त' की छुट्टी थी, इसलिए स्कूल में एक दिन पहले ही 'स्वतंत्रा दिवस' मना रहे थे।
मन में लड्डू फूट रहे थे। एक तो अगले दिन की छुट्टी थी और दुसरा,
मैंने बहुत सारी पतंगे उड़ाने की तैयारी करी हुई थी। मैंने स्कूल जाते हुए मम्मी
को अवाज दी, "मम्मी, मैं स्कूल जा रहा हूँ", और ये कहते हुए तेजी से बाहर
निकला। मुझे पता था, की आज तो कोई पढ़ाई होने नही वाली। आज बहुत
मज़ा आ रहा था स्कूल जाने में। स्कूल में प्रार्थना के बाद, प्रधानाध्यापक
जी ने तिरंगा झंडा फहराया और सभी बच्चों को आगे के कार्यक्रम के
लिए प्रोग्राम-हॉल में जाने को कहा।
Hindi Kahani - 15 अगस्त और मेरी तैयारी !!
मैं भी अपने दोस्तों के साथ सीधा हॉल में पहुंच गया। हमने सबसे आगे वाला बेंच चुना बैठने के लिए।
वहां से सारे कार्यक्रम ज़्यादा अच्छे से नजर आते थे। मंच पर सबसे पहले प्रधानाध्यापक सर को बुलाया गया।
उन्होंने '15 अगस्त' का महत्त्व समझाया और सबको इस दिन की शुभकामनायें दी।
फिर 'डबराल सर' ने, जो की हमारे हिंदी के अध्यापक थे। हमे सम्बोधित किया और कार्यक्रम को आगे बढ़ाया।
बच्चों ने बहुत सुंदर नृत्य-नाटिका प्रस्तुत की, भाषण दिये और उसके बाद पुरस्कार वितरण भी हुआ।
ये पुरस्कार पहले हुई कुछ प्रतियोगिताओं के लिये दिए गए थे। जैसे, चित्रकारी, निबंध लेखन और
अच्छे नंबर लाने वाले विद्यार्थियों को भी इसमें शामिल किया गया था। अब बारी थी मिठाई बाटने की।
सभी बच्चों को मोतीचूर के लड्डू दिए गये और फिर छुट्टी की घोषणा कर दी गई।
घर आकर हमेशा की तरह मैं सीधा अपने दोस्तों के साथ खेलने निकल पड़ा।
Hindi Kahani - 15 अगस्त और मेरी तैयारी !!
अगले दिन सुबह जैसे अपने आप ही जल्दी आंख खुल गई थी। बहुत खुशी हो रही थी।
आज तो पूरा दिन पतंग उड़ाने की तैयारी थी। जल्दी से नहाने और नाश्ता करने के बाद मैं और
मेरे बड़े भैया, हम दोनों, पतंग और मांजे की खरीददारी करने निकल पड़े।
हम अपनी साइकिल पर थे, हर साल की तरह इस साल भी हम पतंग लेने थोड़ी दूर जाते थे।
क्यूंकि वहां ज़्यादा अच्छी पतंग और मांझा मिलते थे। सुबह से ही पतंग की दुकानें सज गई थी।
बहुत लोग खरीददारी कर रहे थे। रंग-बिरंगी पतंगे, अलग-अलग तरह की चरखियां, मांझे, सब था वहां।
हमने अपनी पसंद की पतंग खरीदी और उन सभी के अलग-अलग नाम भी मशहूर थे,
जैसे, परियाल पतंग, कांच की पतंग, चांद पतंग, तिरंगा पतंग वग़ैरा।
मांझा भी बहुत सोच समझकर लिया, जिससे ज़्यादा से ज़्यादा पेंच काटे जा सकें।
इस सब के बाद हम घर आये और सीधा अपने घर की छत पर पहुँच गए।
अब तक पूरा आसमान पतंगों से भर गया था। कुछ पतंगें तो अपने आप कट कर सीधा हमारी छत पर आ जा रही थी।
Hindi Kahani - 15 अगस्त और मेरी तैयारी !!
हमने भी पतंग बाजी शूरू कर दी। बहुत मजा आ रहा था।
मम्मी ने आज के दिन पकोड़े और पुदीने वाली हरि चटनी बनाई थी।
वो लेकर हम छत पर आ गये। खूब पकोड़े खाये और साथ मे कोल्ड ड्रिंक भी पीते रहे।
साथ वाली छत पर भी लड़कों की टोली जमा थी और खूब गाना-बजाना भी पतंगबाज़ी के साथ चल रहा था।
हमारे कुछ और दोस्त भी अब तक आ गए थे। पकोड़ा-पार्टी और पतंगों का मज़ा दोस्तों के साथ दोगुना हो गया था।
शाम तक हमने पतंग उड़ाई। कुछ लड़के तो रात को भी पतंग में कैंडिल
लगा कर उड़ा रहे थे। क्या खुबसूरत दिन रहा वो '15 अगस्त'।


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