Hindi Kahani - नए साल की तैयारी !! - Hindi Kahani - मनु की कहानियां !!

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बुधवार, 1 जुलाई 2020

Hindi Kahani - नए साल की तैयारी !!


Hindi Kahani - नए साल की तैयारी !!

अब तक ठंड ठीक से आयी नही थी।

साल का आखिरी महीना चल रहा था। इस साल मानो ठंड पड़ी ही नही है।

सब दोस्तों की टोली सुबह से ही क्रिकेट खेलने के लिये पार्क पहुंच जाते और साथ ही साथ नया साल कैसे मनाया जाये ये सोचते रहते।

सबने अब नए साल की तैयारी शूरू कर दी थी। वो दिन भी आ ही गया "31 दिसंबर का दिन"।

सब सुबह से ही पुरे ज़ोर-शोर से तैयारिओं में लग गए। शाम होते-होते सभी चीज़ों का बंदोबस्त हो गया था।

पूरी कॉलोनी को हमने रोशनी वाली झालरों से सजा दिया था और पार्क के बीच में लकड़ियों का एक ढेर लगा दिया था।



Hindi Kahani - नए साल की तैयारी !!

कुछ हल्के-फुल्के खाने का भी प्रबंध कर लिया था। रात होते-होते सभी पार्क में एकत्रित होने लगे।

सभी ठंड से कांप रहे थे। आज ठंड पूरे ज़ोरों पर थी।

धुंध तो अभी से सब कुछ अपने आगोश में लिये जा रही थी। हवा का नामो-निशान तक नही था। 

सभी के आ जाने के बाद हमने लकड़ियों में आग लगाई और गाने भी चला दिए।

सभी नाचने गाने लागे और साथ ही साथ चाय पकोड़ो का भी आनंद लेते रहे।

ठंड ने नए साल का मज़ा और बढ़ा दिया था।


Hindi Kahani - नए साल की तैयारी !!

अब तक धुंध बहुत बढ़ गई थी। हाथ को हाथ नहीं दिखाई दे रहा था। 

सबने एक दुसरे को नये साल की शुभकामनायें दी और घर लौट गए।

हमारे सभी साथी अभी वहीँ जमे रहे और बातें करते करते किसी ने कहा " क्या तुम में से कोई, अकेला, कॉलोनी के पीछे वाली रोड़ पर जाकर आ सकता है ?"

आधी रात से अधिक हो गई थी 

और उपर से घना कोहरा। ये दोनो चीज़ें ही डर को बढ़ाने के लिए काफी थी।

जैस-तैसे 2 दोस्त जाने को तैयार हुए। वो अब पीछे वाली सुनसान रोड़ की तरफ चल दिए।

वो पुरा एक चक्कर काट कर ही वापस आये, ये देखने के लिये हम भी उनके पीछे हो लिये।

बहुत मुश्किल से कुछ दिख रहा था। कोहरा अब और घना हो चुका था। 

इतने में हमने एक सफ़ेद साया देखा। जो हमारी ही तरफ़ आ रहा था।

मारे डर के हम सभी चिल्ला पड़े और भूत भूत कहकर भाग खड़े हुए।

डर के कारण, एक दोस्त सीधा उस साये की तरफ ही भाग पड़ा।


Hindi Kahani - नए साल की तैयारी !!

हमने देखा की वो साया भी भागने लगा। हमे लगा की भूत हमसे डर गया।

जैस-तैसे जान बचाकर हम वापस पार्क में इक्कट्ठा हुए, फिर अंत में हांफते हुए मैंने पुछा,

"भूत को किसीने पास से देखा क्या ?" 

मेरे एक मित्र ने हस्ते हुए कहा, " अरे वो भूत नही था, वो तो भूतल वाले शर्मा अंकल थे, जो हल्ला-गुल्ला सुनकर बहार आ गये थे।

धुंध में उन्होंने हमें ही भूत समझा और भाग खड़े हुए और उसी तरह हम भी उन्हें भूत समझ रहे थे।

सभी इस बात पर हंस दिए 😊😊😊 और अंत में इस तरह हमने नए साल का स्वागत किया ।




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