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शुक्रवार, 26 जून 2020

Hindi Kahani - अंजान टैक्सी का रहस्य !! #www.kahanidiet.in


Hindi Kahani - रात बहुत हो गई थी। मैं अपने एक दोस्त की शादी में सेंट्रल दिल्ली आया हुआ था।

दोस्तों के साथ बातें करते करते कब आधी रात से ज़्यादा हो गयी, पता ही नही चला।

मैंने अब घर वापस आने के लिए सबसे विदा लेनी चाही।

सभी दोस्त रात को वहीं शादी में रुकने की ज़िद करने लगे,

लेकिन मुझे अगले दिन ऑफिस जाना था, इसलिए सबको मना करना पड़ा और अपनी कार की तरफ चल दिया।

दोस्तों के साथ अच्छा समय बीता। बस यही सोचते हुए मैं अपनी कार स्टार्ट करने लगा।

बहुत कोशिश के बाद भी मेरी कार शुरू नही हो रही थी।

अब तक रात भी काफी हो गई थी। आस पास कोई मैकेनिक भी नही था।

मैंने अपनी कार वहीं छोड़ने का फैसला किया और सोचा की अगले दिन वहां आकर उसे ठीक करा लुंगा।

अब मैं घर जाने के लिये टैक्सी की तलाश करने लगा।

मुझे वहां कोई नज़र नही आ रहा था। मैं बाहर का तरफ आ गया। वहां थोड़ा जंगल था। 

कोई टैक्सी या ऑटो वहां भी नज़र नहीं आ रहा था।

फिर मुझे ध्यान आया की मैं ऑनलाइन टैक्सी भी बुक कर सकता हूँ।

मैंने  एक टैक्सी अपने फोन से बुक करी और इंतज़ार करने लगा।

अभी ज़्यादा  समय भी नही हुआ था, की एक टैक्सी मेरे पास आकर रुकी

और चालक ने मुझसे पूछा की क्या मैंने ही टैक्सी बुक करी है।

मैंने भी सीधा हाँ कहा और टैक्सी में बैठ गया। मुझे थोड़ी देर में नींद आ गई थी।

कुछ देर बाद चालक ने मुझे जगाते हुए कहा, "साहब आपका घर आ गया है"।

मुझे थोड़ा अजीब लगा क्यूंकि मेरे घर का रास्ता बहुत उलझा हुआ था।

अभी तक कोई भी चालक बिना रास्ता बताये वहां नहीं पहुंचा था।

मुझे लगा की वो पहले भी शायद यहाँ आया होगा कभी।

मैंने ऑनलाइन पेमेंट करी और घर जाकर सो गया। अगले कुछ दिन सामान्य रहे।

Hindi Kahani - मैंने अपनी कार भी ठीक करा ली थी। एक दिन फिर वही गड़बड़ हो गई।

मैं ऑफिस से निकल ही रहा था और कार शुरू ही नही हुई।

मैंने इस बार भी एक टैक्सी बुक करी और कुछ ही सेकंड में एक टैक्सी मेरे सामने खड़ी थी।

चालक ने गाड़ी का दरवाजा खोला और अंदर आने का इशारा किया। मैंने सोचा वाह ! क्या तेज़ सेवा है। 
मैं अंदर बैठते ही चौंक गया। ये वही ड्राइवर था जो शादी वाले दिन मिला था।

मैंने उसके हाल-चाल पूछे, पर उसने कोई उत्तर ना दिया।

घर पहुंचने के बाद मैंने फिर से ऑनलाइन पेमेंट कर दी। ऐसा एक बार और हुआ।

फिर मुझे लगा ये मात्र इत्तेफाक है।

लेकिन मेरे होश तब उड़ गए, जब मेरे फोन में टैक्सी के पूरे पैसे रिफंड हो गए।

ये पूरे महीने मेरे द्वारा किया गया भुगतान था जो मैंने  टैक्सी की कंपनी को किया था।  

और लिखा था की टैक्सी उपलब्ध ना होने  के कारण सारे पैसे रिफंड किये जा रहे है।

कंपनी से कोई टैक्सी कभी आयी ही नही थी।
तो वो कौन था, जिसकी टैक्सी में मैं अक्सर आया करता था ?

बहुत सारे सवाल थे मन में। इस वाक़्ये के बाद मेरी कार कभी ख़राब नही हुई।

और ना ही वो टैक्सी वाला मुझे दुबारा मिला।

आज भी मैं सोचता हूँ, क्या ऐसा हो सकता है या फिर कोई वहम था मुझे।




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