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मंगलवार, 7 जुलाई 2020

Hindi Kahani - बस यूँ ही...!! My Blog | # मनु की कहानियां


Hindi Kahani - बस यूँ ही…!!

शाम हो चली थी। गर्मियों की ये एक सुहानी शाम थी। हल्की राहत थी गरमी से।

मैंने मम्मी को अवाज दी और कहा, "मैं अभी ज़रा नीचे घूमने जा रहा हूँ "।

हमारा घर दुसरी मंजिल पर था।

मैं नीचे उतरा और घर के पास वाली पुलिया पर आकर बैठ गया।

थोड़ी देर में मेरा दोस्त सोनू भी वहां आ गया और हम बातें करने लगे।

फिर और भी दोस्त वहां आते गए। अब तक हमारी संख्या करीब 7 या 8 हो गई थी।

हम झुंड बना कर कॉलोनी के एक कोने में खड़े हो गए।

कॉलोनी के बड़े लोग हमे आते जाते देखते और हम उन्हें नमस्ते अंकल जी कह कर संबोधित करते।

गौरतलब है कि हमारी कॉलोनी के लगभग सभी लोग हमे जानते थे।

इस तरह झुंड बना कर हम किसी और कॉलोनी में खड़े नही हो सकते थे।

क्यूंकि हम सभी दोस्त बहुत तेज़ आवाज़ में बात किया करते थे और बहुत हल्ला-गुल्ला होता।

कई बार तो जिस व्यक्ति का घर नज़दीक होता तो वो हमे आकर कह भी देता,

"बेटा यहां शोर मत करो"।

अक्सर हम कॉलोनी के पास की बनी पुलिया पर ही मिला करते। सब शाम होते ही वहां आ जाया करते।


Hindi Kahani - बस यूँ ही…!!

फिर कभी क्रिकेट की बातें, तो कभी कॉलेज के किस्से। बस यही सब चलता रहता।

कुछ देर बात करने के बाद हम घूमना शूरू कर देते।

अब 8 लड़के  एक साथ चल नही पाते थे। क्यूंकि पूरी सड़क ही कवर हो जाया करती थी।

इसलिए हम 3-4 के छोटे-छोटे समूह में घुमा करते और बातें करते जाते।

हमारे ही समूह में एक लड़का था, अवीन, जो की बहुत तेज हंसा करता था।

जब वो हस्ता तो हम सब ऐसा दिखाते की वो हमारे साथ नही है।

आते-जाते सभी लोग हमे गुस्से से देखा करते और शैतान लड़को की टोली समझते।


Hindi Kahani - बस यूँ ही…!!

एक बार हम रोज़ के तरह मिले और घुमने लगे। मेरा एक दोस्त, 

इशांत, जो की दिखने में बिलकुल सीधा सादा नज़र आता था, उसे एक भाई साहब ने बुलाया।

हालाँकि हम अपनी ही कॉलोनी में घूम रहे थे ,

तब भी उसको रोक कर ऐसे पूछ-ताछ करने लगे मानो वो कोई अपराधी हो।

कहाँ रहते हो, क्या करते हो, यहाँ क्यों घूम रहे हो, वगैरह, वगैरह।

हमे लगा ये भैया इशांत को जानते होंगे जो इतनी लंबी बातें कर रहे है।

वो उस ग्रुप से अलग ले जाकर बात कर रहे थे।

इशांत ने आते ही गुस्से में कहा, "कौन है यार ये, मुझसे कुछ ज़्यादा ही पूछ-ताछ कर राहा था"।

हम सब हैरान थे। ख़ैर, ऐसा एक बार और हुआ। तब हम सब हंस दिये और

उसका मज़ाक उड़ाने लगे, कि वो शकल से उन्हें गुंडा लगा होगा।

ऐसे ही समय निकल जाता। रात को घर आकर स्वादिष्ट खाना खाकर बढ़िया नींद आती। 


Hindi Kahani - बस यूँ ही…!!

रविवार का इंतेज़ार बड़ी ही बेस्बरी से हुआ करता था।

क्यूंकि तब हम पूरा दिन क्रिकेट मैच खेला करते थे।

दूसरी कॉलोनी के लड़के भी रविवार को हमारे यहाँ मैच खेलने आते थे 

और खूब शोर-गुल के बीच मैच हुआ करते। 

आउट और नॉट आउट, कुल रन कितने हुए,  गेंदे कितनी हुई, रन लेते समय बैट लाइन पर आ गया था या नही,

इन सब बातों पर खूब बहस हुआ करती।

क्रिकेट मैच तो जैसे इज्जत का सवाल हुआ करते थे। बहोत थक जाया करते थे रविवार को।

लेकिन फिर शाम होते ही वही क्रिया फिर से शूरू। कॉलोनी में घूमा करते थे, बस यूं ही......!!

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