अब किसी भी निजी कंपनी में कार्य करने का बिलकुल भी मन ना था।
छुट्टी ना मिलने के कारण, ना जाने कितनी ही शादियों में मैं नहीं जा पाया।
कितने ही उत्सव छूट गए। अब और नहीं, अब मुझे सब उत्सव मनाने थे, और सब निमंत्रण में जाना था।
इस तरह के पारिवारिक समारोहो में शामिल होना था। रिश्तेदारों के सुख-दुख में शरीक होना था।
इन परेशानियों के चलते कभी कभी नौकरी त्यागने का भी सोचता हूँ,
फिर मैंने ऐसी बहुराष्ट्रीय कंपनी की नौकरी त्यागी और एक छोटे से विभाग में बाबू के पद पे ज्वाइन किया।
Hindi Kahani - सपनों की दुनिया !!
कभी-कभी सोचता हूँ, कहीं नोटों से भरा हुआ एक बस्ता मिल जाये और मैं अपना जीवन शांति और सुकून से गुज़ारूं।
अधिक का लालच नही है मुझे, जीवन यापन हो जाये बस। हां कोई लॉटरी लग जाये, या अचानक बहुत सारा पैसा मेरे बैंक खाते में आ जाये।
ज़्यादा लालच नही है, लेकिन एक सुखद समाजिक जीवन जीने की इच्छा है बस।
सुबह अपने मन-मर्ज़ी समय पर उठूं। कार्यालय जाने की चिंता ना हो।
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दोस्तों के साथ जाकर, स्वादिष्ट कचौरियों का आनंद लेते हुए समय बीते।
फिर दोपहर होते ही , पुरानी दिल्ली के मशहूर राजमा चावल खाने जाएं।
शाम को अद्रक वाली एक कप चाय और रात को अपना घर का खाना।
बस ऐसे ही पूरा दिन यहाँ वहाँ दोस्तों के साथ घूमते हुये निकल जाये।
अच्छी-अच्छी जगह घूमना और वहां के सबसे स्वादिष्ट व्यंजन खाना, ये ही तो ज़िंदगी है।
कोई और चिंता ही ना हो।
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जब गर्मियों से सर्दियां आ रही होती है, तब ऐसा लगता है मानो बस इस मौसम में घूमते ही रहो।
ऐसे सर्दियों के मौसम में जो दोस्तों के साथ क्रिकेट खेलने का आनंद है उसका अलग ही अनुभव है।
जब मन हुआ, बस यूं ही घुमने निकल गए, बिना किसी योजना के।
ये सपनों की दुनिया बहुत सुंदर है। है ना!!
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'समय की चाल को सपनो के सहारे कुछ देर के लिये तो बदल ही सकते हैं।
अपनी मन-मर्ज़ी की ज़िन्दगी मिलना भी कितना आनंद देता है।'
तो कैसी लगी आपको ये कहानी, ऐसी ही मनोरंजक कहानिया पढ़ने के लिए आते रहे इस ब्लॉग पे hindify.xyz

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