एक सुबह मैंने उठकर, अपने घर के पीछे के दरवाज़े को खोला, और पाया कि बिल्ली के 3 बच्चे बैठे हैं। बहुत ही प्यारे थे वो। मैंने घर में आकर सबको बताया। फिर एक कटोरे में उनको दूध और बिस्कुट खाने को दिए।थोड़ी ही देर बाद उनकी मां भी वहां आ गयी और मैंने उसे भी दूध पीने को दिया।
जब उन्हें भूख लगती थी, तो वो हमारे दरवाज़े पर आकर बैठ जाते और पैरों की आहट पाते ही आवाज़ निकालने लग जाते। उन बच्चों को अब समझ आ गया था ये हमारा घर है और अब वो एंजेल के साथ खूब खेलते।एंजेल की नानी अनको रोज़ दूध बिस्कुट देती। अब ये उनको खूब पसंद आने लगा। इसके अलावा अगर कभी हम दूध में ब्रेड मिला कर देते, तो वो सिर्फ़ दूध ही पीते और ब्रेड को वैसे ही छोड़ देते।
बिल्ली के बच्चे कुछ जल्दी ही बड़े हो गए और एंजेल अभी 5 साल की ही हुई थी। वो फिर अपने अपने रास्ते चल दिए और एंजेल अक्सर आज भी जब किसी बिल्ली को देखती है तो वो उसे नानी की बिल्ली ही कहती है। आज भी कभी कभी वो बिल्लियां हमारे घर आया करती हैं और हम भी उनको उतना ही प्यार करते हैं।

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