चमकती आखों का राज़ !!
Hindi Kahani - हम सब एक शादी में आये हुए थे।
पूरा परिवार शादी के उत्सव में बढ़ चढ़कर हिस्सा ले रहा था। हर तरफ खुशियों भरा माहौल था।
खाना खाते, बातचीत करते करते अब आधी रात हो चुकी थी। सभी अपने कार्य में व्यस्त थे।
मुझे वॉशरूम जाने की ज़रूरत मेहसूस हुई तो मैं बाहर बने एक सहकारी शौचालय की तरफ बढ़ चला! क्युकी घर में कुछ ज़्यादा ही लोग थे तो मुझे लगा बाहर ही चलते है, थोड़ी सैर भी हो जाएगी।
रास्ते में मुझे मेरे दादा जी भी मिल गए और वो भी बातें करते करते साथ हो लिए।
थोड़े समय बाद जब मैं शौचालय से बाहर आया तो पास ही बने एक नलके के पास आकर रुक गया, क्यूंकि मेरे आगे पहले से एक व्यक्ति खड़ा था और हाथ धो रहा था, मैं इंतेज़ार करने लगा ।
अब तक दादा जी भी वहां आ गए और हम दोनों अपनी बातें करने में व्यस्त हो गए।
कुछ ज़्यादा ही समय लगा रहा था वो व्यक्ति।
अब मेरे दादा जी ने उसे कहा, "भाई जल्दी करो, हमे भी हाथ धोने हैं"।
लेकिन जैसे उस पर कोई असर ही नही हुआ हो।
नलका खुल्ला हुआ था, लागतार बहते पानी की अवाज आप साफ सुन सकते थे!
एक बार फिर दादा जी ने कहा, " जल्दी करो भाई, कौन हो तुम, कहां रहते हो...?" परंतु वो आदमी हट ही नही रहा था।
वहाँ हर कोई एक दुसरे को अच्छी तरह जानता था और दादा जी को अपनी कॉलोनी के सभी लोगों के नाम तक पता थे!
लेकिन वो उस रहस्यमई आदमी को पहचान नही पा रहे थे।
एक बार फिर कोई उत्तर ना अया, वो व्यक्ति हाथ धोता ही रहा और ऐसा व्यवहार कर रहा था, मानो हम वहां है ही नही।
अब मैंने कहा, "अरे भाई, हमे भी हाथ धोने दो" और ये कहते हुए मैं उसके नज़दीक चला गया।
अब वो आदमी पलटा।
अंधेरे में उसका चेहरा साफ़-साफ़ नज़र नही आ रहा था, लेकिन उसकी आँखें किसी बिल्ली के जैसी चमक रही थी।
दादाजी ने उसे पहले यहाँ कभी नही देखा था, और उसकी आँखें डरा देने वाली थी।
मैं एक पल को डर गया और थोड़ा पीछे हट गया। वो कुछ देर हमे घूरता रहा।
दादा जी ने मेरा हाथ पकड़ा और वहाँ से चलने का इशारा किया।
उन्होंने मेरा हाथ इतनी ज़ोर से पकड़ा था, की उनकी उंगलियों के निशान मेरे हाथ पर छप गए थे।
वो पसीने से नहा गए थे। मैं भी अत्यंत डर गया था।
मेरे पूछने पर की वो क्या था दादाजी, उन्होंने कोई उत्तर ना दिया।
और आगे से वहाँ कभी ना जाने की सख़्त हिदायत भी दे दी।
Hindi Kahani - चमकती आखों का राज़ !!
मेरे मन में और भी प्रश्न उमड़ रहे थे। क्या किसी इंसान की आँखें किसी बिल्ली की तरह चमक सकती है?
उस इंसान का चेहरा साफ़ साफ़ क्यों नही दिख रहा था ?
क्या वो इंसान ही था या फिर कुछ और...? आज भी इन प्रश्नो का कोई उत्तर नही है...
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