मैं अब अपने कॉलेज के अंतिम वर्ष में था। मैंने अपने घर में एक नई मोटर-साइकिल की मांग रखी।
क्यूंकि अब मैं बड़ा हो गया था, कम से कम मुझे तो ऐसा ही लगा था,
इसलिये मुझे एक मोटर-साइकिल की ज़रूरत महसूस होने लगी थी।
घर में कभी भी इस बात के लिये मना नही किया गया था। लेकिन मेरी मोटर-साइकिल कभी आयी भी नही।
मैंने सोचा की जो भी करना है, मुझे ही करना होगा। अब तक मैंने अपनी स्नातक की पढ़ाई भी पुरी कर ली थी।
मैंने अब एक निजी कंपनी में नौकरी करनी शुरू कर दी। थोड़े-थोड़े पैसे जमा किये
और लगभग एक साल बाद मैंने अपनी मोटर-साइकिल के लिये पैसे जोड़ लिये थे। मैं बहुत खुश था।
दिवाली की सुबह मैंने मोटर-साइकिल लेने की सोची। एक रात पहले मुझे नींद ही नही आ रही थी।
सारी रात तारे गिनते हुए बीती। सुबह मेरी आंखें सूज गई थी। जब नाश्ते की टेबल पर पहुंचा तो सभी हंसने लगे।
मेरी बड़ी बहन ने कहा, "मोटर-साइकिल की वजह से तू रात भर नही सोया लगता है"।
मेरे पिताजी ने हस्ते हुए कहा, "तेरी मोटर साइकिल एक रात में कहीं गायब नही हो गई होगी। वहीं शोरूम में ही होगी"।
सभी ज़ोर से हंस दिए ये सुनकर। मैंने जैसे-तैसे जल्दी-जल्दी नाश्ता किया और तैयार हो गया।
Hindi Kahaniya - नई मोटर साइकिल की चाहत !!
अब वो समय आ गया था जब मुझे मेरी मोटर-साइकिल मिलने वाली थी। मेरे पेट में गुदगुदी सी महसूस हो रही थी।
बस जल्दी से अपनी नई नवेली मोटर-साइकिल की सवारी करने को मिल जाये।
मैं, पापा और मेरा बड़ा भाई, हम सुबह शोरूम गए।
वहां कौन सा रंग लेना है, ये समझ नहीं आ रहा था। पहले मैंने सोचा, की काले रंग की मोटर-साइकिल लुंगा।
लेकिन फिर लाल रंग मुझे ज़्यादा पसंद आ गया। मैने उसी रंग की मोटर-साइकिल खरीदी।
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आज भी वो सब याद करके मन खुश हो जाता है।
घर पहुँचने पर,मैंने घर के नीचे से ही मम्मी को अवाज़ लगाई और कहा, "देखो कितनी सुंदर मोटर-साइकिल है। "
मम्मी ने कहा, "बहुत सुंदर है।" मम्मी ने नीचे आकर मोटर-साइकिल को तिलक लगाया और
फिर हम मोटर-साइकिल को सीधा मंदिर ले गए। वहां पंडित जी नी पूजा करी,
नारियल फोड़ा और एक लाल चुन्नी मोटर-साइकिल के हैंडल पर बांध दी।अब पंडित जी ने,
मोटर-साइकिल के अगले और पिछले टायर के नीचे एक निम्बू रखा और मोटर-साइकिल आगे बढ़ाने को कहा।
जिससे वो दोनों निम्बू फूट गए। पंडित जी को दक्षिणा देने के बाद हम घर आ गए और फिर सबने मिठाई खाई।
मैंने मिठाई खाई और फिर सीधा मोटर-साइकिल चलाने निकल पड़ा।
पूरा दिन मैंने कॉलोनी में मोटर-साइकिल चलाई और दोस्तों के साथ खूब मस्ती करी।
इस चककर में दोपहर का खाना भी नही खाया था। लेकिन भूख भी किसे थी।
मेरा पेट तो मोटर-साइकिल चलाकर ही भर गया था।
वो मोटर-साइकिल आज भी मेरे पास है और मुझे उतनी ही पसंद है।


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