Hindi Kahaniya- गर्मियों की छुट्टियां !! My Blog || #kahanidiet.in - Hindi Kahani - मनु की कहानियां !!

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मंगलवार, 14 जुलाई 2020

Hindi Kahaniya- गर्मियों की छुट्टियां !! My Blog || #kahanidiet.in


परीक्षा के नतीजे आ गए थे। सब बच्चे अब नई कक्षा में बैठने लगे। बहुत ही आनंद आ रहा था। सब ने अपनी अपनी पसंद के मेज़ चुन लिये थे और कुछ बच्चों ने पेन से उन पर अपना नाम भी लिख दिया था। नई पुस्तकें, नया माहौल, नए अध्यापक, ये सब कुछ बड़ा आनंद देने वाला था। लेकिन इससे भी कहीं अधिक इंतेज़ार था, गर्मियों की छुट्टियों का। हमने तो कितने दिन बाकी रह गए है, ये भी गिनना शुरू कर दिया था। हर रोज़ एक दिन कम होता जाता। हम और खुश हो जाते। पढ़ाई में भी मज़ा आ रहा था। 

अब हम बड़ी कक्षा में जो आ गए थे। अध्यापक भी अब हमसे अधिक समझदारी की अपेक्षा करने लगे और अक्सर कहते की, "अब तुम बड़ी कक्षा में आ गए हो, थोड़ा अधिक जिम्मेदार बनो "। हमे भी अच्छा लगता ये सुनकर।  खैर, अब वो दिन आ ही गया, जब  गर्मियों की छुट्टियां पड़ने वाली थी। हम सब बस यही दुआ कर रहे की कोई ज़्यादा कड़ा होम-वर्क ना दे दे। और हुआ भी कुछ ऐसा ही। एक या दो विषयों का ही होम-वर्क मिला।

बाकी विषयों के अध्यापकों ने हमे अपनी मर्ज़ी से पढ़ाई करने को कह दिया। छुट्टियों से एक दिन पहले हमारा पढ़ाई करने का बिलकुल भी मन ना था। और शायद अध्यापक भी ऐसा ही कुछ सोच रहे थे। हमने पूरा दिन खूब मज़े किये। शोर थोड़ा कम ही किया ताकी प्रधानाध्यापक तक हमारा शोर-गुल ना पहुंचे। स्कूल से जाते समय सबने एक दूसरे को अलविदा कहा और घर चल दिए। 

कितना आनंद आ रहा था, रास्ते को तय करने में। कल से स्कूल की छुट्टियां जो थी। घर आकर तो जैसे रात को आखों से नींद ही गायब थी। कॉलोनी के दोस्तों के साथ-साथ सुबह पार्क जाने का प्लान बनाया था। सुबह जब हम पार्क पहुंचे तो वहां और भी दोस्त मिल गए। 

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Image by Annalise Batista from Pixabay


पार्क में खेल-कूद करने के बाद वापस घर आये और फिर आगे की योजना बना ली। 

पूरा दिन व्यस्त रहता था। थोड़ा बहुत समय पढ़ाई को भी दिया जाता था। सुबह पार्क जाने से शुरुआत होती थी और शाम तक दोस्तों के साथ ही समय बीतता था। अब ऐसे करते-करते हुए छुट्टियां कहां गायब हो गई, पता ही नही चला। अब जैस उलटी गिनती शुरू हो गई थी।

स्कूल जाने के दिन नज़दिक् आने लगे थे। अब स्कूल जाने का दिन भी आ ही गया। जाने छुट्टियां इतनी जल्दी क्यों ख़त्म हो जाती है। एक दो दिनों तक तो ज़्यादा पढाई भी नही होती थी। फिर धीरे-धीरे सब नियमानुसार होने लगता था।  स्कूल में मस्ती और पढाई के दिन फिर शूरू हो जाते थे।


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