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सोमवार, 8 जून 2020

Hindi Kahaniya - लिफ़्ट का रहस्य !! My Blog | # मनु की कहानियां


मेरे भाई को प्रशिक्षण  के लिये दिल्ली के एक सहकारी अस्पताल में भेजा गया, उस समय  वो एक्स-रे तकनीशियन की पढ़ाई कर रहा था।

जिसका कुल समय 6 महीने का था। उसके बाद उनकी परीक्षाएं प्रारम्भ होनी थीं। भाई को सुबह की पाली में आने को कहा गया।

समय अच्छा बीत रहा था, वो मन लगा कर कार्य कर रहा था और अपनी  परीक्षा  के लिये  नोट्स भी बनाता रहा।

तकरीबन  4 महीने बीत जाने के बाद उसको रात्री की पाली में आने को कहा गया।

इसमें कुछ अजीब ना था, क्यूंकी अस्पतालों में दिन और रात, हर समय काम चलता रहता है।

भाई के कुछ मित्र भी अब तक वहां बन गए थे।

जैसे ही उन्हें पता चला की अब  भाई को रात की पाली में काम करना  होगा,

उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, "रात के समय  लिफ्ट का इस्तेमाल मत करना।"



बस इतना ही उन्होंने कहा और भाई को एक संशय में छोड दिया।

वो भी सोचता रहा, जाने ऐसा क्या है, जो रात को लिफ्ट का इस्तेमाल नही करना।

खैर, अब रात को कार्य प्रारम्भ हुआ। सब कुछ रोज की तरह चल रहा था। धीरे-धीरे अस्पताल  में  लोगों  की सँख्या कम होती चली गई।

रात करीब  2.30 बजे के लगभग सभी कुछ शांत हो गया था।

अब भाई को थोडी नींद  भी आने  लग गई थी। उसने अपने रूम की कुरसी पर  बैठ कर थोडा अ!राम करने की सोची।

जैसे ही भाई अपनी कुरसी पर बैठा, उसे लगा मानो कोई अस्पताल की लिफ्ट से ऊपर आ रहा हो।

भाई का कमरा लिफ्ट के ठीक सामने प्रथम तल पर ही था। अचानक लिफ्ट आकर रुकी और उसका दरवाजा खुला।

इस समय तक भाई अपने रूम में ही था। उसने सोचा कोई आया होगा उपर। 

लेकिन काफी समय बीत जाने के बाद भी, ना ही  किसी के पैरों की आवाज़ आयी और ना ही  किसी ने दरवाजा खटखटाया।

अब भाई को थोडी शंका हुई और वो  जिज्ञासावश  लिफ्ट की तरफ गया। वहां  कोई ना था।

वो वापस अपने रूम में आकर बैठ गया। अब तक उसे यू लगने लग गया था,

कि कुछ तो  सही नही  है।

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लिफ़्ट 



कुछ समय बाद, दोबारा  ऐसा हुआ, और इस बार किसी के पैर की आवाज़ सुनाई दी। 

मानो कोई लड़की अपने पूरे गहने पहने हुए, एक्स-रे रूम की तरफ आ रही हो। 
ये आवाज़ और नज़दीक आती चली गई। और फिर सब शांत हो गया। 
बाहर जाकर देखा तो फ़िर कोई ना था। 
भाई ने पूरी मंजिल का एक चककर लगाया, की शायद कोई इधर उधर भटक गया हो।
लेकिन रात के सन्नाटे के अलावा वहाँ कोई ना था। तभी एक सहायक नीचे से, 
सीढ़ियां चढ़ते हुए उपर अ!या और भाई को ऐसे आशंकित देखकर बोला, 
"क्या हुआ, आप बाहर क्या ढूंढ रहे है सर ?" भाई ने पुरी घटना उसे बताई और कहा, "ना जाने वो लड़की कहाँ चली गई ? "
 इतना सुनना था की उस सहायक के चेहरे पर डर के भाव उभर आये, 
और उसके  माथे पर हल्का पसीना भी आ गया।



बिना समय गंवाए उसने भाई को तुरंत नीचे चलने को कहा। 

जब दोनों भूतल पर आकर बैठे, तब सहायक ने कहा, 
"सर जी, कभी भी ऐसा मत करना, ये लिफ्ट रात  के समय अपने आप उपर नीचे आती है 
और किसी लड़की के होने का एहसास होता है, जो प्रथम तल पर घूमती है। 
ये बात पूरे अस्पताल को पता है, किसीने आपको नही बताया।" 
जवाब में भाई ने, नहीं में उत्तर दिया। आज  से पहले उसे ऐसा कुछ अनुभव नहीं हुआ था। 
मन आशंकित था, कौन  है वो लड़की ?, क्यों सिर्फ रात  के समय  ही  उसके होने  का एहसास  होता है ?, क्या हुआ हुआ होगा वहाँ ? 
परन्तु इन बातों  का जवाब, वहाँ  किसी के भी पास नही था।
अगले दिन सुबह जब घर आकर भाई ने नाश्ते की टेबल पर 
हम सबको ये वाक़या सुनाया, तो हम सब डर  गए। 
और भाई को भुतल पर ही रहने की सलाह दी, सिर्फ काम के समय ही प्रथम तल पर जाने को कहा।  




फिर भाई सोने चला गया। उसने अपने प्रशिक्षण  के 6 महीने वहां पूरे किये और अच्छे नंबर हासिल किये। 

मेरे मन में  एक प्रश्न आज भी आता  है, ऐसा क्यों  होता है वहाँ ......। 
ये एक सत्य घटना है, जो की साल 2007 में दिल्ली के एक अस्पताल में घटी थी।





तो कैसी लगी आपको ये कहानी, ऐसी ही मनोरंजक कहानिया पढ़ने के लिए आते रहे इस ब्लॉग पे www.kahanidiet.in... 



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