प्रकृति के संग !! - Hindi Kahani - मनु की कहानियां !!

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मंगलवार, 9 जून 2020

प्रकृति के संग !!


 हवा में हल्की हल्की ठंडक थी, अभी दोपहर  के 3 बजे थे। एक ऊंचे स्थान से शहर की सुंदरता जैसे  निखर कर आ रही थी। हर तरफ ऊँचे-ऊँचे  पहाड़  और उन पर बने  हुए  घर, किसी काल्पनिक कहानी का एहसास  दे रहे थे। दिल्ली से क़रीब 300 किलोमीटर का दूर, ये जगह है, "मसूरी"

प्रकृति के संग !!

प्राकृतिक दृश्यों 
 से भरपूर। पहाड़ों के बीच सांप जैसी प्रतीत  होती सड़कें, छोटे-छोटे पानी के झरने, हवा की मधुरता  और ये पहाड़, सब मिल्कर जैसे एक  स्वर्ग का  निर्माण कर रहे थे। सांय  काल में जब  दिन और रात आपस  में  एक मित्र की भांति  मिल रहे  होते है और आसमान हल्के नारंगी  रंग की आभा  लिए  होता  है, तब  जैसे  सम्पूर्ण  आसमान किसी सुंदर स्त्री  के लहराते  आंचल का सा प्रतीत होता है।

रात्री में, जब  पहाड़ पर  बने घरों  में  रौशनी  होती  है, मानो तारे टिमटिमाने  लगे हो। जैसे आसमान ही  धरती पर उतर आया  हो। दूर-दूर तक  रात की  काली चादर में  आसमान  और धरती  के तारे मन  मोह लेते हैं। सुबह एक ताज़गी  ले कर आती है, उगता सूर्य रात्रि  की ठण्ड को अपने  तेज से कम करता जाता  है। उसकी चमकती रौशनी पेड़ों पर धूप-छाओं  का खेल,  खेल रही होती है। 

सारा वातावरण अत्यंत शांतिमय बन जाता  है।  जिस प्रकार बारिश होने के पश्चात, सब वृक्षों के पत्ते चमक उठते हैं, ठीक वैसा ही प्रतीत हो रहा था। एक हरे रंग की चादर ने पेड़ों को ढका हुआ था। यहाँ  एक बार आने  के पश्चात, वापस शहर जाने का मन  ही  नही होता। यहाँ की सुंदरता  आपको जाने ही  नही देती। मन यहीं  का होकर रह जाता है।





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