लैंडलाइन का इंतज़ार !! - Hindi Kahani - मनु की कहानियां !!

Breaking

इस ब्लॉग में Hindi Kahani, Hindi Kahaniya, Hindi kahani lekhan, Short Stories for kids और आपके मनोरंजन के लिए लिखी गई विभिन्न प्रकार की काल्पनिक कहानियां शामिल हैं...

Categories

शुक्रवार, 12 जून 2020

लैंडलाइन का इंतज़ार !!


बात उन दिनों  की है, जब  हम पड़ोसी  का फोन नंबर अपने  रिश्तेदारों  को दिया  करते। अब थोड़ी  शरम आया करती  थी  ये कहते हुए, की  "ये  PP नंबर है, कोई आवश्यक कार्य  हो, तभी  कॉल किजिएगा ।"  हमारे बार-बार ज़िद करने  पर, पिताजी  ने लैंडलाइन फोन के लिये अवेदान किया। हम सभी  अत्यंत  खुश थे। चलो अब तो अपना भी फोन होगा, किसी के घर नही जाना होगा फोन के लिये ।हमे लगा, की महीने दो महीने में फोन महाराज के दर्शन अवश्य ही  हो जायेंगे, परन्तु ऐसा कुछ  ना हुआ। महीने  साल में  बदल गए  और हम जब भी जा कर पूछते, की "हमारा फोन कब लगेगा ?", तब एक ही ज़वाब मिलता, "लिस्ट के अनुसार जब आपका नंबर आएगा, तब लग जायेगा।"

अब तक करीब करीब 3 साल हो चुके थे फोन का आवेदन  किये हुए । पिताजी  ने बड़े भाई को कहा, की " ज़रा जाकर एक बार पता कर आओ, कब तक नंबर आएगा हमारा। " भाई ने फोन के कार्यालय  जाकर पता किया, ज़वाब  मिला, " अगर इतनी ही जल्दी  है तो  कुछ अतिरिक्त फीस भरकर, जल्दी  लगवा लो, हमारा समय ना  बर्बाद करो ।"

अब तो लगने लगा था, फोन का सुख ना मिल पायेगा। मेरे  कॉलेज के मित्र कहते, "अपना फोन नंबर दे दो ज़रा", और जब मैं कहता की "कोई फोन है ही नही", ये सुनते ही वो नाराज़गी दिखाते हुए कहते, "नही देना तो मत दो, झूठ तो  ना बोलो"। अब किसी को क्या समझाऊं, यही सत्य है।  

एक दिन जैसे बिना  बादल के वर्षा हो गई हो, घर के दरवाज़े  की घंटी बजी और दरवाज़े  पर फोन लिये एक कर्मचारी खड़ा  था। " आपका फोन लगाना है, बताइये कहाँ रखें ?",  फोन अंदर वाले कमरे में लगवाया। कर्मचारियों ने अपनी बक्शीश ली और चले गए।

लैंडलाइन का इंतज़ार !!
अब हमने फ़ोन  मिलाने शूरू किये सभी रिश्तेदारों  को, दोस्तों को और अपना फोन नंबर दिया। फ़ोन  की घंटी  का भी अपना महत्व था। कहीं कॉल के पैसे ना लग जाएं  इसलिये हम कॉलोनी के दोस्त अक्सर मिस कॉल देकर एक दूसरे को बुलाया करते। कभी-कभी बात भी कर लिया करते, फ़ोन  की घंटी बजते ही  उठाना पड़ता था नही तो पता ही  नही चलता था कि किसने फ़ोन  किया होगा। हफ़्ते में कम से  कम  एक बार तो  सभी  रिश्तेदारों और दोस्तों  से बात हो जाया करती  थी। समय के साथ, लैंडलाइन का चलन जाता  रहा और आज लगभग खत्म ही  हो गया है। लैंडलाइन के तारों  से रिश्ते बंधे रहते थे और ज़्यादातर फ़ोन नंबर याद होते थे।   
 

याद आते हैं वो लैंडलाइन के सुनहरे दिन.... 

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

कृपया Comment बॉक्स में किसी भी प्रकार के स्पैम लिंक दर्ज न करें।