Hindi Kahaniya - हवाई-जहाज़ की यात्रा !! Blog by Manu Mishra || #kahanidiet.in - Hindi Kahani - मनु की कहानियां !!

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सोमवार, 27 जुलाई 2020

Hindi Kahaniya - हवाई-जहाज़ की यात्रा !! Blog by Manu Mishra || #kahanidiet.in

   

Hindi Kahaniya - हवाई-जहाज़ की यात्रा !!


मेरा वीज़ा लगकर आ गया था। अब मुझे अमेरिका जाने की तैयारी करनी थी।

बहुत थोड़ा ही समय रह गया था। मात्र एक हफ्ता ही बचा था। ये मेरी पहली उड़ान थी।

मुझे पहले दिल्ली से रूस जाना था और फिर वहां से न्यूयॉर्क

आख़िरकार वो दिन भी आ गया, जब मुझे यात्रा करनी थी।

मैं रात तक अपनी पैकिंग ही करता रहा।

घर में सब मुझे याद दिलाते जा रहे थे, कि क्या-क्या रखना है।

अब एयरपोर्ट के लिए निकलने का समय हो गया था।

मेरे साथ, मेरी बहन, भांजी, पापा जी और भाई भी मुझे एयरपोर्ट छोड़ने आ रहे थे।

रास्ते के लिये, मेरी बहन ने परांठे और अचार पैक करके दिया था।

हमें घर से निकले हुए अभी 15-20 मिनट हुए थे की मुझे याद आया 

की मैं अपनी जैकेट तो रखना ही भूल गया था।


Hindi Kahaniya - हवाई-जहाज़ की यात्रा !!


हमने एक बाजार में कार रोकी और वहां जैकेट का पता किया।

लेकिन अभी गर्मियों का मौसम था, कहीं भी सर्दियों की जैकेट नही मिली। खैर अब हम आगे बढ़ चले।

एयरपोर्ट आकर मैंने अपना सामान ट्रॉली में रखा और आईडी दिखाकर अंदर , परिसर में आ गया।
मैंने अपनी एयरलाइन का काउंटर ढूंढा और अपने टिकट लिए।

छोटा हैंड-बैग अभी भी मेरे पास ही था और मेरे दोनों बड़े बैग जमा कर लिये गए थे।

अब मैं इमिग्रेशन के लिए आगे चल दिया। इमिग्रेशन के बाद मैं अपने विमान का इंतेजार करने लगा।

विमान अपने  निरधारित समय पर आया

और अब सभी एक गलियारे से होते हुए विमान में बैठने के लिये चल दिए।

मैंने अपनी सीट देखी और बैठ गया। हैंड-बैग मैंने सीटों के उपर बने कंपार्टमेंट में रख दिया।

अब हम सभी यात्री विमान के उड़ने का इंतेजार करने लगे। धीरे-धीरे विमान चला और रनवे पर आ गया।

फिर एक तेज आवाज़ के साथ विमान के इंजन अपनी पूरी क्षमता से काम करने लगे 

और हमारा जहाज़ आगे बढ़ चला।

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हवाई-जहाज़


Hindi Kahaniya - हवाई-जहाज़ की यात्रा !!


थोड़ी ही देर में हम हवा में थे। नीचे सब कुछ दूर होता जा रहा था। आसमान साफ था।

दूर तक देखा जा सकता था।

छोटे-छोटे घर, रास्ते, गाड़ियां, ये सब नजर आ रहे थे। फिर विमान बहुत ऊंचाई पर आ गया।

क्षितिज साफ नज़र आ रहा था। ढलता सूरज अपने रंग आसमान में बिखेर रहा था। रात घिरने लगी थी।

तारे नज़र आने लगे थे। मानो आगे बढ़कर हाथ लगा लो। तारों से भरा आसमान बहुत अच्छा लग रहा था।

मैं ये सब देख ही रहा था की, नाश्ता लेकर विमान-परचारिका आ गई।

मैंने वेज नाश्ता लिया और फिर से बाहर के नज़ारों में व्यस्त हो गया।

थोड़ी देर के लिये मेरी आंख लग गई थी। कितनी देर सोया, कुछ पता नही चला।

अब रात के खाने का समय हो चला था। रात का खाना परोसा गया।

खाना खाने के बाद मैंने बाहर देखा तो हम बादलों के उपर उड़ान भर रहे थे।

ऐसा लग रहा था, नीचे रुई का भंडार हो। एकदम सफ़ेद और मुलायम।

बहुत सुंदर लग रहा था। हमने करीब 6 घंटे के लगभग उड़ान भरी और मॉस्को एयरपोर्ट उतरे।

वहां मैंने अपनी अगली फ्लाइट पकड़ी जिसने मुझे न्यूयॉर्क पहुंचा दिया।यहाँ सब कुछ ठीक ही रहा। 


ये एक कभी ना भूलने वाला सफर रहा।



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